West Bengal ki Rajdhani Kya hai | पश्चिम बंगाल की राजधानी क्या है?

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दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको West Bengal ki Rajdhani Kya hai इसके बारे में बताने वाले यदि आपको West Bengal ki Rajdhani kahan hai यह जानने में इंट्रेस्ट है तो आप इस अतिकाल को पूरा पढ़ सकते है क्यूंकि इस आर्टिकल में हम आपको West Bengal ki rajdhani से रिलेटेड बहुत सारी जानकारी देने वाला हूँ

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तो यदि आपको West Bengal ki Rajdhani Kya hai इसके साथ साथ उसकी राजधानी के बारे में भी जानना चाहते है तो इस आर्टिकल को आप पूरा पढ़ सकते है इस आर्टिकल में आपको बहुत ही विस्तार से बताया गया है West Bengal ki Rajdhani Kya hai

पश्चिम बंगाल की राजधानी क्या है? (West Bengal ki rajdhani kahan hai)

पश्चिम बंगाल की राजधानी ‘कोलकाता’ है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की प्रतिष्ठापन जॉब चार्नोक ने अगस्त 1690 में की थी। भारत मे कोलकाता पाँचवा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इस शहर को ‘आनन्द का शहर’ भी कहा जाता है। कोलकाता शहर हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बांग्लादेश की सीमा से लगभग 80 किमी की दूरी पर स्थित हुआ है और वहीं बंगाल की खाड़ी के शीर्ष तट से 180 किलोमीटर दूर स्थित है।

ब्रिटिश शासन के दौरान जब कोलकाता एकीकृत भारत की राजधानी थी, उस समय कोलकाता को लंदन के बाद ब्रिटिश साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता था। इस शहर की पहचान महलों का शहर, पूरब का मोती इत्यादि के रूप में थी। कोलकाता भारत के प्रमुख महानगरों में से एक है

यानी कि यह भारत देश के दूसरा सबसे बड़ा महानगर है जो भारत देश के पुरानी राजधानी और भारत मे अंग्रेजों का सर्प्रथम आगमन का स्थान से प्रसिद्ध और परिचित है। कोलकाता शहर रेलमार्गों, वायुमार्गों तथा सड़क मार्गों द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है इसलिए इसे ‘पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है।

कोलकाता नामकरण कैसे हुआ (Kolkata How did the naming happen?)

अगर कहा जाय तो आधिकारिक रूप से इस शहर का नाम कोलकाता 1 जनवरी 2001 को रखा गया था। इसे पहले अंग्रेजी नाम से ‘कैलकटा’ कहा जाता था परंतु वहाँ के स्थानीय निवासी जो बंगाली लोग थे अपने शब्दों में वे इस शहर को पहले से ही कोलकाता या कोलिकाता कहा करते थे। इस शहर का नाम सम्राट अकबर के चुंगी दस्तावेजों और 15वीं सदी के विप्रदास की कविताओं में बार-बार उल्लेख मिलता है।

जैसे जैसे हम कोलकाता के नाम की उत्पत्ति की जानकारी को जुटाते गए वैसे वैसे हमे इसके नाम के अनेकों कहानियों और मान्यता मिलती गई। हिन्दू मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि हिंदुओं की देवी काली के नाम से ही इस शहर के नाम की उत्पत्ति हुई है। वहीं  चीन के प्राचीन यात्रियों के यात्रा वृत्तांत और फारसी व्यापारियों के दस्तावेजों में इस शहर के अस्तित्व का उल्लेख व्यापारिक बंदरगाह के रूप में मिलता है।

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बंगाल का नाम हिंदुओं के महाभारत ग्रन्थ में भी सुनने को मिलता है जो युद्ध के द्वारान कौरवों के साथ दे रहे थे। 1757 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने इस नगर को जीत लिया था और इसका नाम “अलीनगर” रख दिया।

पश्चिम बंगाल की राजधानी की इतिहास

यह आधुनिक भारत के शहरों में सबसे पहले बसने वाले शहरों में से एक है। कोलकाता का इतिहास भारत देश के एकीकरण होने से पहले से प्रारम्भ होती है। उस समय से पहले भी जब अंग्रेजों ने भारत देश को अपनी अधिकृत कर लिया था और वहाँ शासन कर रहे थी।कोलकाता का इतिहास ईस्ट इंडिया कंपनी से शुरू होती है जब अंग्रेजों ने 31 दिसम्बर 1600 ईस्वी में अपना अंग्रेजी कंपनी को कोलकाता में स्थापित किया।

कोलकाता का इतिहास बनना सन 1690 ईसवी से शुरू होती है जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के एक अधिकारी जाब चार्नोक द्वारा यहां पर एक व्यापार चौकी की स्थापना की थी। कोलकाता का विकास उस समय से शुरू हो गया जब सन 1717 ईस्वी में मुग़ल बादशाह फ़र्रुख़सीयन ने ईस्ट इंडिया कम्पनी को 3,000 रुपये वार्षिक भुगतान पर व्यापार की अनुमति दे दी थी।

परंतु 1757 ईस्वी में में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने कोलकाता (उस समय कोलिकाता) पर आक्रमण कर उसे जीत लिया और इसका नाम “अलीनगर” रख दिया लेकिन साल भर के अंदर ही सिराजुद्दौला की पकड़ यहाँ ढीली पड़ गयी और यह शहर पुन: अंग्रेजों के अधिकार में हो गया। 1757 ईस्वी तक कोलकाता पूरी तरह से ब्रिटिश सरकार के अधीन हो गई।

अब चलते है 1772 ईस्वी में जब कोलकाता ब्रिटिश भारत की राजधानी नहीं बना था, उस समय वहाँ के प्रथम गवर्नर-जनरल ‘वारेन हेस्टिग्ज़’ ने अपने अधिकारी क्षेत्र मुग़ल की राजधानी मुर्शिदाबाद से सभी महत्त्वपूर्ण कार्यालयों का स्थानान्तरण इस शहर में कर दिया। धीरे धीरे सन 1773 ईस्वी में बंबई और मद्रास, फ़ोर्ट विलियम स्थित शासन के अधीन आ गए। कई वर्षों तक अंग्रेजों ने अपना शासन यहाँ स्थापित किया। परंतु कोलकाता सन 1911 तक ही भारत का राजधानी बना रहा

इसके बाद अंग्रेजों का तत्कालीन महाराजा जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली कर देने का ऐलान किया। जानकारी के लिए बटीए दें कि इस वक्त रानी ‘मैरी’ थी। 12 दिसंबर 1930 को दिल्ली को भारत की राजधानी बनाने का एलान किया गया था और 13 फरवरी 1931 को दिल्ली को आधिकारिक तौर पर राजधानी घोषित किया गया।  सन 1947 ईस्वी में जब बंगाल का भारत और पाकिस्तान के बीच बँटवारा हो रहा था तो उस वक्त कोलकाता बहुत पिछड़ गया था। उस वक्त कोलकाता मात्र पश्चिम बंगाल की राजधानी बन कर ही रह गया।

पश्चिम बंगाल की राजधानी की क्षेत्रफल और जनसंख्या

भारत देश का दूसरा सबसे बड़ा महानगर कोलकाता का क्षेत्रफल कोलकाता 185 वर्ग किलोमीटर यानी कि 71 वर्ग मील है। कोलकाता शहर का घनत्व 21000 पर्तिवर्ग किलोमीटर है। अगर इस शहर की जनसंख्या की बात करे तो वर्ष 2001 में हुई जनगणना के अनुसार कोलकाता शहर की जनसंख्या लगभग 4,572,876 थी जिसमे से कुल 2,500,040 लोग पुरुष और बाकी 2,072,836 स्त्री थी। वहीं 2011 में हुई जनगणना के अनुसार कोलकाता राजधानी की जनसंख्या लगभग 4,496,694 है जिसमे से कुल 2,356,766 पुरुष और 2,139,928 स्त्री है।

और अगर बात करे कोलकाता महानगर की जनसंख्या के बारे तो यह 2011 जनगणना के अनुसार लगभग 4,496,694 है। जनगणना के अनुसार कोलकाता की जनसंख्या का 80% भाग हिन्दू हैं। शेष 18% मुस्लिम, 1% ईसाई और 1% जैन लोग हैं। अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में सिख बौद्ध, यहूदी और पारसी समुदाय आते हैं। कोलकाता शहर की साक्षरता दर 81% से भी अधिक है जो काफी अधिक्तकता को प्रदर्शित करती है। इस शहर की लिंगनुपात 1000 पुरुष पर 928 महिला है।

पश्चिम बंगाल की राजधानी की भौगोलिक स्थिति

कोलकाता पूर्वी भारत में 22°34′22″ उतर 88°21′50″पूर्व / 22.57278° उतर 88.36389°पूर्व निर्देशांक पर स्थित है। यह  गंगा डेल्टा क्षेत्र में 1.5 मी॰ (यानी कि 5 फीट) से 9 मी॰ (यानी कि 30 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ की सबसे ऊपजाऊ मिट्टी जलोढ़ मिट्टी होती है।

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कोलकाता में उष्णकटिबंधीय आर्द्र-शुष्क जलवायु रहती है। यहाँ का औषत मासिक तापमान 29 डिग्री सेंटीग्रेड से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तक होता है। यहाँ अधिकतम वर्षा 1582 मिलीमीटर तक होती है जो जून के अंत से सितंबर महीने तक होती है। हालांकि वर्षा का आगमन अगस्त महीने में ही प्रारंभ हो जाती है।

West Bengal की राजधानी की शिक्षा (Education of the Capital of West Bengal)

अस्सी के दशकों के बाद कलकत्ता की शैक्षिक हैसियत में भले ही गिरावट हुई लेकिन कोलकाता में अभी भी शिक्षा स्तर अच्छी है। यहाँ भी प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कि पढ़ाई की जा सकती है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी ऐसे विश्वविद्यालय स्थापित है जहाँ से उच्च शिक्षा ग्रहण किया जा सकता है जैसे-

नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय, जादवपुर विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय, बंगाल अभियांत्रिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल तकनीकी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल पशुपालन एवं मतस्य पालन विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता विश्वविद्यालय।

अगर संस्था की बात करे तो यहाँ भी अनेकों संस्थायें है जैसे भारतीय प्रबंधन संस्थान, एशियाटिक सोसायटी, सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, भारतीय साँख्यिकी संस्थान, मेघनाथ साहा आण्विक भौतिकी संस्थान।

बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, प्रेसीडेंसी कालेज, एंथ्रोपोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफार्मेशन टेक्नालजी, रामकृष्ण मिशन संस्कृति संस्थान, जियोलाजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय होमियोपैथी संस्थान, स्काटिश चर्च कालेज, श्रीरामपुर कालेज यहाँ के प्रमुख संस्थायें है। यहाँ बहुत से लोग अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरे दूसरे राज्य से भी आते है।

West Bengal की राजधानी में घूमने की जगह

ईडन गार्डन्स:- कोलकाता का Eden Gardens में एक छोटे से तालाब में बर्मा का पेगोडा स्थापित किया गया है यह दृश्य इस Gardens का विशेष आकर्षक बनाती है तथा दर्शको को भी लुभाती है। कोलकाता के इस Gardens में रोजाना घूमने के लिए लोग आते रहते है।

मैदान और फोर्ट विलियम:- कोलकाता का मैदान और फोर्ट विलियम Hooghly River के समीप स्थित है। यह भारत के सबसे बड़े parks में से एक है। यह मैदान 3 वर्ग KM के क्षेत्र में फैला हुवा है। मैदान के पश्चिम में फोर्ट विलियम है। इसे अब Indian Army के लिए उपयोग में लाया जाता है। यहाँ Enterकरने से पहले अनुमति लेना आवश्यक होता है।

विक्टोरिया मेमोरियल:- कोलकाता का विक्टोरिया मेमोरियल रानी विक्टोरिया को समर्पित है। इसका निर्माण 1906 से 1921 के बीच मे बनाया गया था। यहाँ की खास बात यह है कि मेमोरियल में एक Great Museum है, जहां रानी के पियानो और स्टडी-डेस्क सहित 3000 से अधिक वस्तुएं (item) प्रदर्शित की गई हैं।

सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च:- इसकी रंगीन कांच की windows, frescoes, grand-alter, एक गॉथिक टावर दर्शकों को ऊनी और आकर्षित करती है। सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च शिल्पकला का अनूठा उदाहरण है।

नाखोदा मस्जिद:- कोलकाता का नाखोदा मस्जिद लाल पत्थर से बनी है। इसका निर्माण सन 1926 ईस्वी को हुवा था। इस मस्जिद (Mosque) में एक साथ करीब 10,000 लोग आ सकते है।

पारसनाथ जैन मंदिर:- यह मंदिर वेनेटियन ग्लास मोजेक, दर्पण लगे खंबों (pillars) से सजा है, सोने का मुलम्मा चढ़ा गुंबद, पेरिस के झूमरों और ब्रूसेल्स, रंगीन शीशों (Chandeliers and Brussels, Colored glass) वाली खिडकियाँ से सजा है। इसका निर्माण सन 1867 ईस्वी को हुवा था।

बेलूर मठ:- कोलकाता का बेलूर मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय (headquarters) है। इसकी स्थापना Swami Vivekananda जी (रामकृष्ण के शिष्य)ने सन 1899 ईस्वी में किये थे।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर:- दक्षिणेश्वर काली मंदिर Hooghly River के पूर्वी तट पर स्थित है। Swami Vivekananda जी के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस इस मंदिर के पुजारी थे।

बॉटनिकल गार्डन्स:- बॉटनिकल Gardens कई एकड़ तक फैला हुआ है। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़, Hooghly River के पश्चिमी ओर स्थित इसी गार्डन में है, जो 10,000 वर्ग मीटर में फैला हुवा है और इसकी लगभग 420 शाखाएं हैं।

West Bengal की राजधानी में यातायात की सुविधा

रेलमार्ग:- कोलकाता की railroad track काफी प्राचीन और व्यस्त मार्ग है। भारतीय रेलवे द्वारा संचालित कोलकाता Metro भारत में सबसे पुरानी भूमिगत यातायात प्रणाली है। कोलकाता में दो मुख्य लंबी दूरि तय करने वाली गाड़ियों वाले Railway station हैं- Howrah Junction और Sealdah Junction। ये भारत देश के विभिन्न शहरों से कोलकाता को जोड़ता है।

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सड़क मार्ग:- यहां के जाएदा तर लोगों द्वारा बसों को प्राथमिक तौर पर यातायात के लिए इस्तेमाल किया जाता है। भाड़े पर उपलब्ध यांत्रिक यातायात में पीली मीटर-टैक्सी और Auto Rickshaw भी हैं। आप चाहे तो आप अपने निजी वाहन से कोलकाता को आसानी और Convenient रूप से जा सकते है। VIP मार्ग कोलकाता शहर को हवाई अड्डे से जोड़ता एक व्यस्त मार्ग है।

वायुमार्ग:- नेताजी सुभाष चंद्र बोस International Airport कोलकाता के दम दम स्थान पर स्थित है। इस Airport से national और International विमान को उड़ाई जाती है। यह देश विदेश को जोड़ने का कार्य भी करता है।

Conclusion

दोस्तों आज की इस आर्टिकल में हम आपको West Bengal ki Rajdhani Kya hai इसके बारे में बताये है क्या आपको West Bengal ki Rajdhani के बारे में अच्छे से समझ में आ गया यदि अभी भी आपके मन में किसी तरह का कोई सवाल है तो आप हमें कम्मेंट में पूछ सकते है आपको आपका जवाब बहुत जल्द दे दिया जायेगा

खेर उम्मीद करते है की West Bengal ki Rajdhani Kya hai ये आर्टिकल को पसंद आया होगा यदि यह आर्टिकल पसंद आया होगा तो इसे आप अपने दोस्तों को सेयर जरूर करें ताकि उन्हें भी इस चीज के बारे में विस्तार से पता चल सके

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